"मेरा बेटा आत्महत्या नहीं कर सकता, उसकी रैगिंग के बाद हत्या की गई" — लक्ष्य मिश्रा के पिता का दावा, दो महीने बाद भी पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार


जमशेदपुर/बेंगलुरु: झारखंड के जमशेदपुर निवासी और मणिपाल इंजीनियरिंग कॉलेज, येलहंका (बेंगलुरु) के सेकेंड ईयर के छात्र लक्ष्य मिश्रा की संदिग्ध मौत का मामला लगातार तूल पकड़ता जा रहा है। घटना को लगभग दो महीने बीत चुके हैं, लेकिन परिवार का कहना है कि उन्हें अब तक पोस्टमार्टम रिपोर्ट उपलब्ध नहीं कराई गई है। उनका आरोप है कि जांच में देरी और कई अहम सवालों के जवाब नहीं मिलने से न्याय की उम्मीद कमजोर पड़ रही है।

लक्ष्य के पिता ने बेहद भावुक शब्दों में कहा, "मेरा बेटा आत्महत्या नहीं कर सकता। उसकी रैगिंग के बाद हत्या की गई और फिर उसे हॉस्टल से नीचे फेंक दिया गया। कॉलेज प्रशासन इसे आत्महत्या बताने की कोशिश कर रहा है, लेकिन घटनास्थल की परिस्थितियां कुछ और ही कहानी बयां कर रही हैं।"परिजनों का आरोप है कि जिस खिड़की से लक्ष्य के गिरने की बात कही जा रही है, उसकी बनावट, शव की स्थिति और नीचे मिले खून के निशान कई गंभीर सवाल खड़े करते हैं। उनका कहना है कि उपलब्ध परिस्थितियां आत्महत्या की बजाय किसी गंभीर अपराध की ओर इशारा करती हैं।
परिवार ने यह भी आरोप लगाया है कि घटना की सूचना पुलिस को समय पर नहीं दी गई। उनका दावा है कि फॉरेंसिक टीम के पहुंचने से पहले ही कमरे से चादर और तकिया हटा दिए गए तथा दरवाजे के हैंडल समेत कुछ हिस्सों को साफ कर दिया गया, जिससे संभावित साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ की आशंका पैदा होती है।परिजनों का कहना है कि घटना के लगभग दो महीने बाद भी उन्हें पोस्टमार्टम रिपोर्ट नहीं दी गई है। उनका आरोप है कि रिपोर्ट में हो रही देरी से मामले को लेकर संदेह और गहरा हो रहा है। परिवार ने मांग की है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट जल्द सार्वजनिक की जाए तथा सभी वैज्ञानिक और डिजिटल साक्ष्यों की स्वतंत्र जांच कराई जाए।

इस घटना ने देशभर में छात्र सुरक्षा, रैगिंग रोकने की व्यवस्था और शिक्षण संस्थानों की जवाबदेही पर भी गंभीर सवाल खड़े किए हैं। परिवार का कहना है कि यदि मामले की निष्पक्ष जांच होती है, तो सच्चाई अवश्य सामने आएगी और दोषियों को कानून के अनुसार सजा मिलेगी।हालांकि, यह उल्लेख करना आवश्यक है कि रैगिंग, हत्या, साक्ष्यों से छेड़छाड़ और अन्य आरोप पीड़ित परिवार द्वारा लगाए गए आरोप हैं। इनकी आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। कॉलेज प्रशासन पहले इस मामले को आत्महत्या का मामला बता चुका है, जबकि पुलिस जांच जारी है। मामले की वास्तविक स्थिति जांच पूरी होने और आधिकारिक निष्कर्ष आने के बाद ही स्पष्ट होगी।

लक्ष्य मिश्रा की मौत केवल एक परिवार का दुख नहीं, बल्कि उन हजारों अभिभावकों की चिंता भी है जो अपने बच्चों को उच्च शिक्षा के लिए घर से दूर भेजते हैं। न्यूज़ टाइम्स झारखंड का मानना है कि इस मामले में निष्पक्ष, पारदर्शी और समयबद्ध जांच होनी चाहिए। यदि किसी की लापरवाही या अपराध सामने आता है तो दोषियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए, और यदि लगाए गए आरोप सही नहीं पाए जाते हैं तो जांच के आधार पर सच्चाई स्पष्ट रूप से सामने आनी चाहिए। न्याय केवल होना ही नहीं चाहिए, बल्कि होता हुआ भी दिखाई देना चाहिए।

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